2014 से जबसे हिंदुस्तान में मोदी सरकार आइ हे, तब से हर दिन उन्हों ने भारत की जनता का शोषण और उद्योगपतिओ की तिजोरियो का पोषण किया हे. नोट बंधी हो, GST हो, या कृषिबिल, हर दफा उन्होंने जनता का शोषण किया हे. और अपने उध्योगपति मित्रो की मदद की हे,
फ़िलहाल देश में भाजपा द्वारा ज कृषि बिल लाया गया हे उसका विरोध चल रहा हे. देश के हर कोने से इस बिल को रद्द करने की आवाज आ रही हे, लेकिन घमंडी और तानाशाह सरकार किसीकी आवाज को सुनने के लिए तैयार नहीं हे, और उनके चमचे मिडिया वाले आन्दोलन की कवरेज भी ठीक से दे नहीं रहे हे,
लेकिन पंजाब और हरियाणा के किसानो ने दिल्ही के सिन्दू बोर्डर तक आ गए हे, वो अपनी बात सरकार के सामने रखना चाहते हे, लेकिन तानाशाह सरकार ने उनके सामने उनको रोकने के लिए पुलिस, वोटर केनन, आर्मी, जैसे संशाशानो का गैरउपयोग करके उनको रोक रखा हे, जरुरत तो ये थी की एसा बलप्रयोग भारत की सीमा पर चीन के खिलाफ करना चाहिए, लेकिन सरकार किसानो के साथ आतंकवादियो जेसा बर्ताव कर रही हे,
किसानो द्वारा कल के दिन 8 दिसंबर को भारत बंध का एलन किया गया हे, जिसको अभीतक 19 पार्टी ने समर्थन किया हे, तो हम आपसे भी निवेदन करते हे की आप भी कल भारत बंध का समर्थन जरुर करे, हम वो कारन जानते हे जिसकी वजह से हमें किसानो का समर्थन करना चाहिए.
1.
भारत कृषिप्रधान देश हे, इस बिल से किसान को अपनी जमीन से हाथ धोना पद सकता हे, उनकी उगाई फसल निचे दामो में बेचनी पड़ती हे, जिससे उनका आर्थिक नुकशान होता हे, जिसकी वजह से उनका मनोबल टूट जाता हे, जिससे वो आत्महत्या जेसे कदम उठाने पे मजबूर हो जाते हे,
2.
जो किसान आन्दोलन में शामिल हे उनको मिडिया वालो ने और कुछ अंधभक्तो ने आतंकवादी और खालिस्तानी कहा और किसानो का अपमान किया, और शाम दाम दंड भेद से आन्दोलन को दबाने की कोशिश की, लेकिन सच्चाई कभी ज्यादा समय तक छुपाई नहीं जा सकती.
3.
अगर किसान अपना अनाज उगाना बंध करदे तो हम खाएँगे क्या, किसान को भारतीय संस्कृति में भगवान का दर्जा दिया गया हे, लेकिन आज किसानो को आतंकवादी और खालिस्तानी कहते हे, अपने हक़ की लड़ाई लड़ने की आजादी हमारा संविधान हमें देता हे,
4.
पिछले 2 महीने से अपने हक़ की लड़ाई लड़ने वाले लोगो को जब सरकार ने सुना नहीं तो वो दिल्ही के लिए कुच कर दिए, और 12 दिन से वो दिल्ही की बॉर्डर पर ठण्ड में अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे हे. वो केवल पंजाब या हरियाणा के किसानो के लिए नहीं बलके पुरे भारत के किसानो के लिए लड़ रहे हे, लेकिन कुछ चुनिन्दा लोग इसको राजकीय नाटक बता रहे हे, कुछ लोग इसे विदेशी ताकतों की चाल भी बता रहे हे, लेकिन ये सब बाते जूठी साबित हुई हे.
आज भले हम ऑफिस या किसी अन्य स्थानों पर काम कर रहे हो, लेकिन हमारे दादा परदादा और पूर्वज खेती से ही हमारा गुजरान चला रहे थे, आज हमारी थाली में जो अनाज आ रहा हे वो किसी किसान की महेनत का नतीजा हे, किसान अपने खेतो में दिन रात , शर्दी हो या गर्मी, चाहे बारिश हो वो महेनत करता हे, उससे उसका मकसद आमिर बनना नहीं होता, वो हमारे लिए ही महेनत करते हे,
तो आओ हम सब मिलकर 8 दिसंबर को भारतबंध का समर्थन करके किसानो का क़र्ज़ अदा करे. अपने हक़ के लिए बच्चे, औरते, बूढ़े, जवान, सब मिलकर तानाशाह सरकार के सामने लड़ रहे हे, तो आप सबसे निवेदन हे की किसानो का समर्थन करे और 8 दिसंबर को भारतबांध का समर्थन करके अपने व्यापर कारोबार को बांध रखे,
जय हिन्द
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